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Pitru Paksh Moral Story 2019

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Pitru Paksh Moral Story 2019 | पितृ पक्ष की कहानी  एक बार गुरु रामानंद ने कबीर से कहा कि हे कबीर! आज श्राद्ध का दिन है और पितरों के लिए खीर बनानी है। आप जाइए, पितरों की खीर के लिए दूध ले आइए...। कबीर उस समय 9 वर्ष के ही थे। वे दूध का बरतन लेकर चल पड़े। चलते-चलते रास्ते में उन्हें एक गाय मरी हुई पड़ी मिली। कबीर ने आस-पास से घास को उखाड़कर गाय के पास डाल दिया और वहीं पर बैठ गए। दूध का बरतन भी पास ही रख लिया। काफी देर हो गई। जब कबीर नहीं लौटे, तो गुरु रामानंद ने सोचा कि पितरों को भोजन कराने का समय हो गया है लेकिन कबीर अभी तक नहीं आया। ऐसा सोचकर रामानंद जी खुद चल दूध लेने पड़े। जब वे चलते-चलते आगे पहुंचे, तो देखा कि कबीर एक मरी हुई गाय के पास बरतन रखे बैठे हैं। यह देखकर गुरु रामानंद बोले - अरे कबीर तू दूध लेने नहीं गया.? कबीर बोले - स्वामीजी, ये गाय पहले घास खाएगी तभी तो दूध देगी। रामानंद बोले - अरे ये गाय तो मरी हुई है, ये घास कैसे खाएगी? कबीर बोले - स्वामी जी, ये गाय तो आज मरी है। जब आज मरी गाय घास नहीं खा सकती, तो आपके 100 साल पहले मरे हुए पितृ खीर कैसे खाएंगे...? यह सुनते ही रामान...

Khatu shyam aarti in hindi lyrics

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Khatu shyam aarti श्री खाटू श्यामजी की आरती ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे। खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥  रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे। तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥  गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट धरे। खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥ मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे। सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥ झांझ कटोरा और घड़ि़यावल, शंख मृदंग धुरे। भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥ जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे। सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥ 'श्री श्याम बिहारीजी' की आरती, जो कोई नर गावे। कहत 'आलूसिंह' स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥ तन मन धन सब कुछ है तेरा, हो बाबा सब कुछ है तेरा। तेरा तुझको अर्पण, क्या लोग मेरा॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥ जय श्री श्याम हरे, बाबा जी जय श्री श्याम हरे। निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥

Annapoorna Devi Aarti in hindi

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Annapoorna Devi Aarti in hindi अन्नपूर्णा देवी आरती (हिन्दी) !! बारम्बार प्रणाम मैया.. बारम्बार प्रणाम,   जो नहीं ध्यावे तुम्हे अम्बिके, कहा उसे विश्राम !! !! अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो.. लेत होत सब काम,  प्रलय युगांतर और जन्मान्तर , कालांतर तक नाम !! !! सुर असुरों की रचना करती.. कहाँ कृष्ण कहं राम,   चुमहि चरण चतुर चतुरानन, चारू चक्रधर श्याम  !! !! चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर..शोभा लखही ललाम,   देवी देव दयनीय दशा में, दया दया तब नाम !! !! त्राहि त्राहि शरणागतवत्सल.. शरणरूप तव धाम,  श्री ह्री श्रद्धा श्री ऐं, विद्या क्लीं कमला काम, !! कांटी भ्रान्तिमयी कांति, शांतिमयीवर दे तू निष्काम !!

Shakumbhari Devi Aarti in hindi lyrics

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आरती श्री शाकुम्भरी देवी जी की (हिन्दी) हरि ओम श्री शाकुम्भरी अंबा जी की आरती क़ीजो एसी अद्वभुत रूप हृदय धर लीजो शताक्षी दयालू की आरती किजो तुम परिपूर्ण आदि भवानी माँ, सब घट तुम आप भखनी माँ शकुंभारी अंबा जी की आरती किजो तुम्ही हो शाकुम्भर, तुम ही हो सताक्षी माँ शिवमूर्ति माया प्रकाशी माँ शाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो नित जो नर नारी अंबे आरती गावे माँ इच्छा पूरण किजो, शाकुम्भर दर्शन पावे माँ शाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो जो नर आरती पढ़े पढ़ावे माँ, जो नर आरती सुनावे माँ बस बैकुण्ठ शाकुम्भर दर्शन पावे शाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो

Shani Pradosh Vrat Katha Puja Vidhi

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शनि प्रदोष व्रत कथा, पूजा विधि, उद्यापन विधि | Shani Pradosh Vrat Katha Puja Vidhi जो प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है वो शनि प्रदोष व्रत कहलाता है। शनि प्रदोष व्रत सभी प्रदोष व्रतों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है वह खोये हुए धन की प्राप्ति करता है और जीवन में सफलता प्राप्त करता है। शनि प्रदोष व्रत कथा | Shani Pradosh Vrat Katha in Hindi प्राचीन समय की बात है। एक नगर सेठ धन-दौलत और वैभव से सम्पन्न था। वह अत्यन्त दयालु था। उसके यहां से कभी कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता था। वह सभी को जी भरकर दान-दक्षिणा देता था। लेकिन दूसरों को सुखी देखने वाले सेठ और उसकी पत्‍नी स्वयं काफी दुखी थे। दुःख का कारण था- उनके सन्तान का न होना। सन्तानहीनता के कारण दोनों घुले जा रहे थे। एक दिन उन्होंने तीर्थयात्र पर जाने का निश्‍चय किया और अपने काम-काज सेवकों को सोंप चल पडे। अभी वे नगर के बाहर ही निकले थे कि उन्हें एक विशाल वृक्ष के नीचे समाधि लगाए एक तेजस्वी साधु दिखाई पड़े। दोनों ने सोचा कि साधु महाराज से आशीर्वाद लेकर आगे की यात्रा शुरू की जाए। पति-पत्‍नी दोनों समाधिलीन साधु क...

Shukra Pradosh Vrat Katha Puja Vidhi

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शुक्र प्रदोष (भुगुवारा प्रदोष) व्रत कथा, पूजा विधि | Shukra Pradosh Vrat Katha Puja Vidhi जो प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है वो शुक्र प्रदोष या भुगुवारा प्रदोष व्रत कहलाता है। इस व्रत को करने से जीवन से नकारात्मकता समाप्त होती है और सफलता मिलती है। शुक्र प्रदोष व्रत कथा | Shukra Pradosh Vrat Katha in Hindi प्राचीनकाल की बात है, एक नगर में तीन मित्र रहते थे – एक राजकुमार, दूसरा ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र। राजकुमार व ब्राह्मण कुमार का विवाह हो चुका था। धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, किन्तु गौना शेष था। एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा- ‘नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है।’ धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरन्त ही अपनी पत्‍नी को लाने का निश्‍चय किया। माता-पिता ने उसे समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं। ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं होता। किन्तु धनिक पुत्र नहीं माना और ससुराल जा पहुंचा। ससुराल में भी उसे रोकने की बहुत कोशिश की गई, मगर उसने जिद नहीं छोड़ी। माता-पिता को विवश होकर अपनी ...

Guru Pradosh Vrat Katha Puja Vidhi

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गुरु प्रदोष व्रत कथा, पूजा विधि, उद्यापन विधि | Guru Pradosh Vrat Katha Puja Vidhi जो प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है वो गुरु प्रदोष व्रत कहलाता है। इस उपवास को रख कर भक्त अपने सभी मौजूदा खतरों को समाप्त कर सकते हैं। इसके अलावा गुरुवार प्रदोष व्रत रखने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। Guru Pradosh Vrat Katha एक बार इन्द्र और वृत्रासुर की सेना में घनघोर युद्ध हुआ। देवताओं ने दैत्य-सेना को पराजित कर नष्ट-भ्रष्ट कर डाला। यह देख वृत्रासुर अत्यन्त क्रोधित हो स्वयं युद्ध को उद्यत हुआ। आसुरी माया से उसने विकराल रूप धारण कर लिया। सभी देवता भयभीत हो गुरुदेव बृहस्पति की शरण में पहूंचे। बृहसप्ति महाराज बोले- पहले मैं तुम्हे वृत्रासुर का वास्तविक परिचय दे दूं। वृत्रासुर बड़ा तपस्वी और कर्मनिष्ठ है। उसने गन्धमादन पर्वत पर घोर तपस्या कर शिव जी को प्रसन्न किया। पूर्व समय में वह चित्ररथ नाम का राजा था। एक बार वह अपने विमान से कैलाश पर्वत चला गया। वहां शिव जी के वाम अंग में माता पार्वती को विराजमान देख वह उपहासपूर्वक बोला- ‘हे प्रभो! मोह-माया में फंसे होने के कारण हम स्त्रियों के वशीभूत रहते हैं ।...

Budh Pradosh Vrat Katha Puja Vidhi Udyapan Vidhi in Hindi

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बुध (सौम्यवारा) प्रदोष व्रत कथा, पूजा विधि, उद्यापन विधि | Budh Pradosh Vrat Katha Puja Vidhi जो प्रदोष व्रत बुधवार के दिन पड़ता है वो बुध प्रदोष व्रत या सौम्यवारा प्रदोष व्रत कहलाता है। इस शुभ दिन पर व्रत रखने से भक्तों की इच्छाएं पूरी होती है और ज्ञान भी प्राप्त होता हैं। बुध प्रदोष व्रत कथा | Budh Pradosh Vrat Katha in Hindi एक पुरुष का नया-नया विवाह हुआ। विवाह के दो दिनों बाद उसकी पत्‍नी मायके चली गई। कुछ दिनों के बाद वह पुरुष पत्‍नी को लेने उसके यहां गया। बुधवार को जब वह पत्‍नी के साथ लौटने लगा तो ससुराल पक्ष ने उसे रोकने का प्रयत्‍न किया कि विदाई के लिए बुधवार शुभ नहीं होता। लेकिन वह नहीं माना और पत्‍नी के साथ चल पड़ा। नगर के बाहर पहुंचने पर पत्‍नी को प्यास लगी। पुरुष लोटा लेकर पानी की तलाश में चल पड़ा। पत्‍नी एक पेड़ के नीचे बैठ गई। थोड़ी देर बाद पुरुष पानी लेकर वापस लौटा उसने देखा कि उसकी पत्‍नी किसी के साथ हंस-हंसकर बातें कर रही है और उसके लोटे से पानी पी रही है। उसको क्रोध आ गया। वह निकट पहुंचा तो उसके आश्‍चर्य का कोई ठिकाना न रहा। उस आदमी की सूरत उसी की भांति थी। पत्‍नी भी स...

Mangal Pradosh Vrat Katha Puja Vidhi

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मंगल प्रदोष व्रत कथा, पूजा विधि, उद्यापन विधि | Mangal Pradosh Vrat Katha Puja Vidhi जो प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है वो भौम प्रदोष व्रत या मंगल प्रदोष व्रत कहलाता है। इस व्रत को रखने से भक्तों की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याए दूर होती है और उनके शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार आता है। भोम प्रदोष व्रत जीवन में समृद्धि लाता है। भौम प्रदोष व्रत कथा | Bhaum Pradosh Vrat Katha in Hindi एक नगर में एक वृद्धा निवास करती थी । उसके मंगलिया नामक एक पुत्र था । वृद्धा की हनुमान जी पर गहरी आस्था थी । वह प्रत्येक मंगलवार को नियमपूर्वक व्रत रखकर हनुमान जी की आराधना करती थी । उस दिन वह न तो घर लीपती थी और न ही मिट्टी खोदती थी । वृद्धा को व्रत करते हुए अनेक दिन बीत गए| एक बार हनुमान जी ने उसकी श्रद्धा की परीक्षा लेने की सोची । हनुमान जी साधु का वेश धारण कर वहां गए और पुकारने लगे -“है कोई हनुमान भक्त जो हमारी इच्छा पूर्ण करे?’ पुकार सुन वृद्धा बाहर आई और बोली- ‘आज्ञा महाराज?’ साधु वेशधारी हनुमान बोले- ‘मैं भूखा हूं, भोजन करूंगा । तू थोड़ी जमीन लीप दे।’ वृद्धा दुविधा में पड़ गई । अंततः हाथ जोड़ बोली- “महा...

Ravi Pradosh Vrat Katha Puja Vidhi

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रवि प्रदोष व्रत कथा, पूजा विधि, उद्यापन विधि | Ravi Pradosh Vrat Katha Puja Vidhi जो प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ता है वो रवि प्रदोष व्रत या भानु वारा प्रदोष व्रत कहलाता है। इस प्रदोष व्रत का लाभ यह है कि भक्त इस दिन उपवास को रखकर दीर्घायु और शांति प्राप्त कर सकते है। रवि प्रदोष व्रत कथा | Ravi Pradosh Vrat Katha in Hindi एक ग्राम में एक दीन-हीन ब्राह्मण रहता था। उसकी धर्मनिष्ठ पत्‍नी प्रदोष व्रत करती थी। उनके एक पुत्र था। एक बार वह पुत्र गंगा स्नान को गया। दुर्भाग्यवश मार्ग में उसे चोरों ने घेर लिया और डराकर उससे पूछने लगे कि उसके पिता का गुप्त धन कहां रखा है। बालक ने दीनतापूर्वक बताया कि वे अत्यन्त निर्धन और दुःखी हैं । उनके पास गुप्त धन कहां से आया। चोरों ने उसकी हालत पर तरस खाकर उसे छोड़ दिया। बालक अपनी राह हो लिया। चलते-चलते वह थककर चूर हो गया और बरगद के एक वृक्ष के नीचे सो गया। तभी उस नगर के सिपाही चोरों को खोजते हुए उसी ओर आ निकले । उन्होंने ब्राह्मण-बालक को चोर समझकर बन्दी बना लिया और राजा के सामने उपस्थित किया । राजा ने उसकी बात सुने बगैर उसे कारागार में डलवा दिया । जब ब्राह्...

Som Pradosh Vrat Katha Puja Vidhi

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सोम प्रदोष व्रत कथा, पूजा विधि, उद्यापन विधि | Som Pradosh Vrat Katha Puja Vidhi Som Pradosh Vrat Katha Puja Vidhi Udyapan Vidhi | जो प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है वो सोम प्रदोष व्रत कहलाता है। इस दिन व्रत रखने से भक्तों के अन्दर सकारात्मक विचार आते है और वह अपने जीवन में सफलता प्राप्त करते है। सोम प्रदोष व्रत कथा | Som Pradosh Vrat Katha in Hindi एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी । उसके पति का स्वर्गवास हो गया था । उसका अब कोई आश्रयदाता नहीं था, इसलिए प्रातः होते ही वह अपने पुत्र के साथ भीख मांगने निकल पड़ती थी । भिक्षाटन से ही वह स्वयं व पुत्र का पेट पालती थी । एक दिन ब्राह्मणी घर लौट रही थी तो उसे एक लड़का घायल अवस्था में कराहता हुआ मिला । ब्राह्मणी दयावश उसे अपने घर ले आई । वह लड़का विदर्भ का राजकुमार था । शत्रु सैनिकों ने उसके राज्य पर आक्रमण कर उसके पिता को बन्दी बना लिया था और राज्य पर नियंत्रण कर लिया था, इसलिए वह मारा-मारा फिर रहा था । राजकुमार ब्राह्मण-पुत्र के साथ ब्राह्मणी के घर रहने लगा । एक दिन अंशुमति नामक एक गंधर्व कन्या ने राजकुमार को देखा और उस पर मोहित हो गई । अगल...