Posts

Showing posts with the label aarti collection in hindi lyrics

Chintpurni Mata ji ki Aarti

Image
चिंतपूर्णी माता जी की आरती  चिंतपूर्णी चिंता दूर करनी जनन को तारो भोली माँ,  जनन को तारो भलो माँ काली डा पुत्र पवन दो घोडा,  सिंह पर भई असवार भोली माँ, चिंतपूर्णी चिंता दूर करो माँ...  एक हाथ खडग दूजे में खड़ा तीजे त्रिशूल संभालो, भोली माँ...  चौथा हाथ चक्कर गदा पांचवे छठे मुंडो की माला, भोली माँ...  सातवे में रुंड मुंड विदारे आठवे से असुर सहारो, भोली माँ...  चप्पे का बाग़ लगा अति सुन्दर बैठी  दीवान लगये, भोली माँ...  हरी ब्रह्मा तेरे भवन विराजे लाल चन्दो भेथी तान, भोली माँ...  औखी घाटी विकट पेंदा टेल बहे दरिया, भोली माँ... सुमन चरण ध्यानु जस गावे, भक्तां दी पज निभाओ  भोली माँ...  चिंतपूर्णी माता जी की आरती समाप्तम 

Shree Ganga Mata ji ki Aarti

Image
श्री गंगा जी की आरती  ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता ।  जो नर तुम को ध्याता, मन वांछित फल पाता ॥  ॐ जय गंगे माता चन्द्र सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता ।   शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता ॥  ॐ जय गंगे माता  पुत्र सागर के तारे, सब जग के ज्ञाता ।  कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुखदाता ॥  ॐ जय गंगे माता  एक ही बार जो तेरी शरणागति आता ।  यम की त्रास मिटाकर, परम गति पाता ॥  ॐ जय गंगे माता  आरती मात तुम्हारी जो नर नित गता ।  दास वही सजह में मुक्ति को पाता ॥  ॐ जय गंगे माता  श्री गंगा जी की आरती समाप्तम 

Shitala mata ki aarti

Image
शीतला माता जी की आरती  जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता, आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता ।  जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता ||  रत्न सिंघ्हासन शोभित, श्वेत छात्र भाता, रिद्धि सिद्धि मिल चवर डोलेवे, जगमग छवि छठा ।  विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवा शिव धता, वेद पुराण वर्णत, पार  नहीं पता   जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता ||  इंद्रा मृदंग बजावत चंद्र वीणा हाथ, सूरज ताल बजावे नारद मुनि गाता  जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता  || घंटा शंख शहनाई बजे मन बता, करे भक्त गन आरती लखि लखि हर्षाता  जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता  || ब्रह्मा रूप वरदानी तुहि तीन काल ज्ञात, भक्तन को सुख देती मातु पिता भरत  जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता  || जो जान ध्यान लगावे प्रेम शक्ति पता, सकल मरोरथ पावे भवनिधि तार जाता  जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता  || रोगों से पीड़ित कोई शरण तेरी आता, कोढ़ी पावे निर्मल काया अँधा नेत्र पता  जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता  || बाँझ पुत्र को पावे दरिद्र काट जाता, ताको भजे जो नहीं सर धुनि प...

Brahma ji ki Aarti

Image
श्री ब्रह्मा जी की आरती  पितु मातु सहायक स्वामी सखा, तुम ही एक नाथ हमारे हो ।  जिनके कुछ और आधार नहीं, तिनके तुम ही रखवारे हो ।  सब भांति सदा सुखदायक हो, दुःख निर्गुण नाशन हारे हो ।  प्रतिपाल करो सिधारे जग को, अतिशय करुणा उर धारे हो ।  भूल है हम तो तुमको, तुम तो हमारी सुधि नाही बिसारे हो ।   उपकरण को कछु अंत नहीं, छीन ही छीन जो विस्तार हो ।  महाराज माह महिमा तुम्हारी, मुझे बिरले बुधवार हो ।  शुभ शांति निकेतन प्रेमनिधि, मन मंदिर के उजियारे हो  इस जीवन के तुम जीवन हो, इन् प्रानन के तुम प्यारे हो ।  तुम सो प्रभु पाए, ' प्रताप हरी', केहि के अब और सहारे हो ।  श्री ब्रह्मा जी की आरती समाप्तम 

Shri Vishnu ji ki Aarti

Image
श्री विष्णु जी की आरती  ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे, भक्त जनों के संकट, शन में दूर करे।  ॐ जय जगदीश  हरे जो धयावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का. सुख सम्पति घर एव, कष्ट मिटे का।   ॐ जय जगदीश श्री हरे   मात पिता तुम मेरे शरण गहुँ में किसकी, तुम बिन और न दूजा अस करूँ में जिसकी ।   ॐ जय जगदीश श्री हरे  तुम पुराण परमात्मा, तुम अंतर्यामी, परब्रह्म परमेश्वर तुम सब के स्वामी ।   ॐ जय जगदीश श्री हरे   तुम करुणा का सागर, तुम पालन करता, मैं मूर्ख खाल कामी, कृपा करो भर्ता।    ॐ जय जगदीश श्री हरे   तुम हो एक अगोचर, सब के प्राणपति, किस विध मिलूं दयामय, तुम मैं कुमति ।    ॐ जय जगदीश श्री हरे दिन बंधू दुःख हारता, तुम रक्षक मेरे, अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा मैं तेरे।     ॐ जय जगदीश श्री हरे  विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, श्रद्धा भक्ति बढाओ, संतान की सेवा।    ॐ जय जगदीश श्री हरे  श्री विष्णु जी की आरती समाप्तम 

Tulsi ji ki Aarti

Image
तुलसी जी की आरती  तुलसी महारानी नमो नमो हरी की पटरानी नमो नमो  बेकुठो आई ये नमो नमो माँ दुर्गा रानी नमो नमो  तुम तुलसी पुराण पाप कीनी हरी चरण कमल लपटानी नमो नमो  तुलसी महारानी नमो नमो हरी की पटरानी नमो नमो  तुलसी के पत्त मंजरी को मन बिन तुलसी हरी एक न मणि नमो नमो  तुलसी महारानी नमो नमो हरी की पटरानी नमो नमो  सुर नर मुनि तेरा ध्यान धरत है अगम निगम पुराण बखानी नमो नमो  तुलसी महारानी नमो नमो हरी की पटरानी नमो नमो   लक्ष्मी माया तेरे गुण गावे भक्ति दान दीजे महारानी नमो नमो  तुलसी महारानी नमो नमो हरी की पटरानी नमो नमो  तुलसी महारानी नमो नमो हरी की पटरानी नमो नमो  तुलसी जी की आरती समाप्तम 

Shri Hanuman ji ki Aarti

Image
आरती  हनुमान जी की  आरती कीजे हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। जाके बल से गिरिवर कांपे, रोग दोष जाके निकट न झांके। अंजनी पुत्र महा बलदाई, संतन के प्रभु सदा सहाई। दे वीरा रघुनाथ पठाये, लंका जारि सिया सुधि लाई। आरती कीजे हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। लंका सी कोट समुद्र सी खाई, जात पवन सुत बार न लाई। लंका जारि असुर सब मारे, राजा राम के काज संवारे। आरती कीजे हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। लक्ष्मण मूर्छित परे धरनि पे, आनि संजीवन प्राण उबारे। पैठि पाताल तोरि यम कारे, अहिरावन की भुजा उखारे। आरती कीजे हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। बाएं भुजा सब असुर संहारे, दाहिनी भुजा सब सन्त उबारे। आरती करत सकल सुर नर नारी, जय जय जय हनुमान उचारी। आरती कीजे हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। कंचन थार कपूर की बाती, आरती करत अंजनी माई। जो हनुमानजी की आरती गावै, बसि बैकुण्ठ अमर फल पावै। लंका विध्वंस किसो रघुराई, तुलसीदस स्वामी कीर्ति गाई। आरती कीजे हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। बोलो सिया पति राम चन्द्र की जय  Hanuman ji ka mantra 

Shri Shiv ji ki Aarti

Image
श्री शिव शंकर जी की आरती जय शिव ओंकारा जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा । ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा एकानन चतुरानन पंचानन राजे । हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे । त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी । त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे । सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी । सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका । प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव ओंकारा लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा । पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा । भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला । शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला ॥ ॐ जय शिव ओंकारा काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी । नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा त्रिगुणस्वामी जी क...

Shri Surya Aarti

Image
आरती श्री सूर्य जी  जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। त्रिभुवन - तिमिर - निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन॥ जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी। दु:खहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी॥ जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। सुर - मुनि - भूसुर - वन्दित, विमल विभवशाली। अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥ जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। सकल - सुकर्म - प्रसविता, सविता शुभकारी। विश्व-विलोचन मोचन, भव-बन्धन भारी॥ जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। कमल-समूह विकासक, नाशक त्रय तापा। सेवत साहज हरत अति मनसिज-संतापा॥ जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। नेत्र-व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा-हारी। वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥ जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।  हर अज्ञान-मोह सब, तत्त्वज्ञान दीजै॥ जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। आरती श्री सूर्य जी समाप्तम  Surya Chalisa in Hindi

Shani Aarti

Image
श्री शनि देव जी आरती  जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी, सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी, जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ॥  सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी,  श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी, नीलांबर धार नाथ गज की अवसारी, जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ॥  सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी,  क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी, मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी, जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ॥  सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी,  मोदक मिष्ठान पान चढ़त है सुपारी, लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी, जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ॥  सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी,  दे दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी, विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी, जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ॥  सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी, शनि  जी का मंत्र:-  ॐ शं शनिश्चराय नमः श्री शनि देव जी आरती समाप्तम  श्री शनि देव जी की आरती 

Mahalaxmi Aarti

Image
महालक्ष्मी जी की आरती  महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं सुरेश्र्वरी | हरिप्रिये नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं दयानिधे ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता | तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता.... उमा ,रमा,ब्रम्हाणी, तुम जग की माता | सूर्य चद्रंमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता.... दुर्गारुप निरंजन, सुख संपत्ति दाता | जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि सिद्धी धन पाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता.... तुम ही पाताल निवासनी, तुम ही शुभदाता | कर्मप्रभाव प्रकाशनी, भवनिधि की त्राता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता.... जिस घर तुम रहती हो, ताँहि में हैं सद् गुण आता| सब सभंव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता.... तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता | खान पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता.... शुभ गुण मंदिर सुंदर क्षीरनिधि जाता| रत्न चतुर्दश तुम बिन ,कोई नहीं पाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता.... महालक्ष्मी जी की आरती ,जो कोई नर गाता | उँर आंनद समाा,पाप उतर जाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता.... स्थिर चर जगत बचावै ,कर्म प्रेर ल्याता | रामप्रताप मैया जी की शुभ दृष्टि पाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी मात...

Pitar Aarti

Image
श्री पितर जी की आरती जय जय पितर महाराज, मैं शरण पड़यों हूँ थारी। शरण पड़यो हूँ थारी बाबा, शरण पड़यो हूँ थारी।। आप ही रक्षक आप ही दाता, आप ही खेवनहारे। मैं मूरख हूँ कछु नहिं जाणूं, आप ही हो रखवारे।। जय।। आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी, करने मेरी रखवारी। हम सब जन हैं शरण आपकी, है ये अरज गुजारी।। जय।। देश और परदेश सब जगह, आप ही करो सहाई। काम पड़े पर नाम आपको, लगे बहुत सुखदाई।। जय।। भक्त सभी हैं शरण आपकी, अपने सहित परिवार। रक्षा करो आप ही सबकी, रटूँ मैं बारम्बार।। जय।। श्री पितर जी की आरती समाप्तम