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Guruji- Soulful Stories

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Guruji - Some Soulful Stories  एक सूटकेस गुरूजी के अनेक कहानियों में से कुछ कहनी आपसे बाटने आई हूँ |  एक आदमी की मृत्यु हो गई, जब उसे एहसास हुआ, उसने देखा कि भगवान अपने हाथ में एक सूटकेस के करीब आ रहा है। - भगवान ने कहा: ठीक है बेटा अपने समय जाने के लिए। - आश्चर्यचकित आदमी ने जवाब दिया: अब? इतनी जल्दी? मेरे पास बहुत सी योजनाएं थीं ... - मुझे खेद है लेकिन जाने का समय है। - उस सूटकेस में आपके पास क्या है? आदमी ने पूछा। - भगवान ने उत्तर दिया: आपके सामान। - मेरा सामान? तुम्हारा मतलब है मेरी चीजें, मेरे कपड़े, मेरा पैसा? -भगवान ने उत्तर दिया: उन चीजें तुम्हारी नहीं थीं वे पृथ्वी से संबंधित थीं। - क्या यह मेरी यादें है? आदमी ने पूछा। -भगवान ने उत्तर दिया: वे कभी आपके साथ नहीं थे वे समय से संबंधित थे - क्या यह मेरी प्रतिभा है? -भगवान ने उत्तर दिया: वे कभी नहीं थे वे परिस्थितियों से संबंधित थे। - क्या यह मेरे दोस्त और परिवार है? -भगवान ने उत्तर दिया: मुझे खेद है कि वे कभी तुम्हारा नहीं थे वे पथ से संबंधित थे। - क्या यह मेरी पत्नी और बेटा है? - भगवान ने उत्तर दिया: वे कभी भी आपके दिल स...

Guruji About Sewa

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गुरूजी सेवा  सेवा ऐसा गुण है जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता है। लेकिन निश्चित रूप से ये कार्य सेवा से बहुत दूर हैं। यदि सेवा कर कटौती योग्य रसीद प्राप्त करने का उद्देश्य है तो यह सेवा नहीं है। यह एक सेवा नहीं है अगर हमारे दिल और आत्मा इसमें नहीं हैं। अगर ईमानदार और ईमानदारी से नहीं किया जाता है तो यह एक सेवा नहीं है। यदि यह आपके रेज़्यूमे का निर्माण कर रहा है तो यह एक सेवा नहीं है। यह एक सेवा नहीं है अगर यह बड़ी और बेहतर चीजों के लिए एक कदम पत्थर है। अगर आपको दूसरों को, अब या बाद में बताने की ज़रूरत है, तो आपने सेवा नहीं की है। यदि सेवा की कमी या उनकी आलोचना आपको दूर ले जाती है तो यह सेवा नहीं है। यदि आप मानते हैं कि यह करने का अधिकार है तो यह सेवा नहीं है। अगर आपको दूसरों के खिलाफ ऐसा करने के लिए लड़ना है तो यह सेवा नहीं है। यदि आप इसे दूसरों से दूर करने के लिए इसे छीनते हैं तो यह सेवा नहीं है। यदि आप मानते हैं कि आप ऐसा करने के लिए सबसे अच्छे हैं तो यह सेवा नहीं है। और, यह एक सेवा नहीं है अगर यह आपको परेशान करता है कि दूसरों ने जो कुछ किया है उसके लिए क्रेडिट लेते हैं। ...

Geeta Saar in Hindi| Bhagavad gita Saar

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Geeta Saar in Hindi| Bhagavad gita Saar-  गीता सार  क्यों व्यर्थ की चिंता करते हो? किससे व्यर्थ डरते हो? कौन तुम्हें मार सक्ता है? अात्मा ना पैदा होती है, न मरती है। जो हुअा, वह अच्छा हुअा, जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है, जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा। तुम भूत का पश्चाताप न करो। भविष्य की चिन्ता न करो। वर्तमान चल रहा है। तुम्हारा क्या गया, जो तुम रोते हो? तुम क्या लाए थे, जो तुमने खो दिया? तुमने क्या पैदा किया था, जो नाश हो गया? न तुम कुछ लेकर अाए, जो लिया यहीं से लिया। जो दिया, यहीं पर दिया। जो लिया, इसी (भगवान) से लिया। जो दिया, इसी को दिया। खाली हाथ अाए अौर खाली हाथ चले। जो अाज तुम्हारा है, कल अौर किसी का था, परसों किसी अौर का होगा। तुम इसे अपना समझ कर मग्न हो रहे हो। बस यही प्रसन्नता तुम्हारे दु:खों का कारण है। परिवर्तन संसार का नियम है। जिसे तुम मृत्यु समझते हो, वही तो जीवन है। एक क्षण में तुम करोड़ों के स्वामी बन जाते हो, दूसरे ही क्षण में तुम दरिद्र हो जाते हो। मेरा-तेरा, छोटा-बड़ा, अपना-पराया, मन से मिटा दो, फिर सब तुम्हारा है, तुम सबके हो। न यह शरीर तुम्हारा है, न त...

Bhagawat Geeta Chapter-18 | Gita Path in Hindi| bhagavad gita

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Bhagawat Geeta Chapter-18 | bhagavad gita भगवद गीता अठारहवाँ अध्याय  अर्जुन ने पूछा हे महाबाहो! हे ऋषिकेश! हे केशिनी सूदन ! सन्यास और त्याग का तत्व पृथक-२ जानने की इच्छा करता हूँ| श्री भगवान ने कहा - कामना वाले कर्मों के त्याग को ज्ञानी लोग सन्यास मानते है और विवेक पुरुष फलों को त्यागना उचित समझते है, कुछ लोग यज्ञ दान और तप आदि कर्मों के न छोड़ने को योग बताते है| हे भारत श्रेष्ठ ! त्याग के विषय में हमारा निश्चय जो है सो सुनो, हे पुरुषसिंह ! त्याग तीन प्रकार हैं| यज्ञ, दान, आउट तप आदि कर्म त्याग  नहीं चाहिए वे अवश्य करने योग्य क्योँकि ये तीनों ज्ञानियों को भी पवित्र करते है| ये सब कर्म आसक्ति और फल को त्याग कर करने चाहिए, मेरा निशिचत मत यही है जो उत्तम है| अपने नियमित कर्मों का त्याग उचित नहीं यदि मोहवश ऐसा किया जाए तो वह तामस त्याग है कर्म दुखप्रद हैं यह विचार के और शरीर के क्लेश के भी से जो त्याग करता है उसे त्याग का फल नहीं मिलता यह राजस त्याग कहलाता है| हे अर्जुन! अपना नियमित कर्म अवश्य करने योग्य है फल तथा आसक्ति को त्यागकर जो किया जाता है वह कर्म सात्विक को त्यागकर जो...

Bhagawat Geeta Chapter-17 | Gita in Hindi- bhagavad gita

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Bhagawat Geeta Chapter-17 | bhagavad gita भागवत गीता सत्रहवां अध्याय  अर्जुन ने पूछा- हे कृष्ण जी ! जो शास्त्र विधि को छोड़ श्रद्धा के साथ पूजन करते है उनकी निष्ठा किस प्रकार की है सात्विक है अथवा राजसी है अथवा तामसी है| श्री कृष्ण जी बोले- प्राणियों के स्वभाव से ही सात्विक राजसी और तामसी ये तीन प्रकार की श्रद्धा है सुनो हे अर्जुन! सबकी श्रद्धा अपनी प्रकृति के अनुसार होती है पुरुष श्रद्धामय है जिसकी जैसी श्रद्धा होती है वह वैसा ही होता है| सात्विक पुरुष देवताओं को पूजते है रजोगुणी यक्ष राक्षसों को पूजते है और तामसी जन भूतो प्रेतों को पूजते है| जो लोग कपट अहंकार काम विषयानुराग और आग्रह युक्त शास्त्र में न कहा हुआ उग्रतप करते है वे मूर्खता से न केवल अपने शरीरस्थ आत्मा को बल्कि मुझे भी कष्ट देते है उन्हें निश्चय पूर्वक आसुरी जानिए | प्रत्येक को तीन प्रकार का आहार प्रिय है| उसी तरह यज्ञ, तप और दान भी तीन प्रकार के है| जिनके भेद सुनिए| आयु सत्व बल आरोग्य सुख और प्रीति को बढ़ाने वाले रस धृत युक्त पोषक और आनंद दायक आहार सात्विको को प्रिय है| कड़वे, खट्टे, नमकीन, गर्म तीखे, रूखे चर...

Bhagawat Geeta Chapter-16| Gita Path in Hindi

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भागवत गीता सोलहवाँ अध्याय श्री कृष्णजी बोले- हे भारत! अभय शुद्ध सतगुणी होना ज्ञानयोग निष्ठा, दान इन्द्रिय दमन, यज्ञ करना तप, सरलता अहिंसा, सत्य, अक्रोध, त्याग, शांति, चुगली न करना, सब प्राणियों पर दया, तृष्णा से बचना, कोमल स्वभाव, लज्जा, चपलता का त्याग, तेज क्षमा, धृति, पवित्रता, द्वेष रहित, अभिमान न करना, देवी सम्पति के सन्मुख जन्म घर ने वालों को यह सब गुण मिलते है| हे पार्थ ! दम्भ, दर्प, अभिमान, क्रोध, कटुभाषण और अज्ञान ये सब आसुरी सम्पति के सन्मुख जन्म लेने वालों को प्राप्त होते है| पांडव ! देवी सम्पति मोक्ष और आसुरी सम्पति बंधन का कारण होती है| तुम शौक न  क्योकि तुम उत्तम देवी सम्पति के भोग को जन्मे हो हे पार्थ! इस लोक में  देव और आसुरी ये दो प्रकार के प्राणी उत्पन्न किय गए है देवी को विस्तार पूर्वक वर्णन कर चुके अब आसुरी को सुनो धर्म में प्रवृति और अधर्म से निवृति असुर लोग नहीं जानते|  उनमें न शौच न आचार और सत्य ही है| वे संसार को असत्य निराधार और अनीश्वर कहते है उनके मन में जगत की उत्पति का कारण काम से प्रेरित पुरुषों के संयोग के अतिरिक्त कुछ नहीं है| मलीन आत्म...

Happy Janmashtami 2019 Images and Wallpapers for WhatsApp status

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On God wallpapers , you get all the happy Janmashtami 2019 images, beautiful HD wallpapers, pictures  to set as your mobile, smartphone, android phone or iPhone wallpaper. These lord Sri Krishna, happy Janmashtami HD wallpapers you can also share with your buddies on WhatsApp or Instagram. These days whatsApp status and Instagram stories are very much in Trend among the youth of India, so it is very easy and pleasuring to share your favourite shri Krishna Janmashtami pictures with them. There are many places associated with Sri Krishna ji in the North India just like vrindavan, gokul, kurukshetra, mathura and many other places which are situated in uttar Pradesh and Haryana. Lord Krishna spent his childhood playing in Vrindavan where he also lift govardhan Parvat with his little finger. There are millions of devotees of shri Krishna, not in India but also in various other countries. They all celebrate the festival of Happy Janmashtami every year with joy and happiness. Every Temp...